Navratri Puja Vidhi: Complete Guide for 9 Days of Devi Worship

नवरात्रि पूजा विधि: देवी पूजा के 9 दिनों के लिए संपूर्ण मार्गदर्शिका

नवरात्रि — देवी दुर्गा की नौ पवित्र रातें — हिंदू कैलेंडर में सबसे शक्तिशाली आध्यात्मिक मौसमों में से एक है। लगातार नौ दिनों तक, हम शक्ति के सभी नौ रूपों की पूजा करते हैं, उपवास रखते हैं, अखंड ज्योति जलाते हैं, और कलश स्थापना के माध्यम से दिव्य स्त्री शक्ति को अपने घरों में आमंत्रित करते हैं। चाहे आप पहली बार नवरात्रि मना रहे हों या अपने परिवार की प्रथा को गहरा कर रहे हों, यह मार्गदर्शिका पहले दिन की कलश स्थापना से लेकर अष्टमी और नवमी पर कन्या पूजन तक सब कुछ शामिल करती है।

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नवरात्रि पूजा क्या है?

नवरात्रि (अर्थ "नौ रातें") साल में चार बार मनाई जाती है, लेकिन चैत्र नवरात्रि (वसंत, मार्च-अप्रैल) और शारदीय नवरात्रि (शरद ऋतु, सितंबर-अक्टूबर) सबसे महत्वपूर्ण हैं। यह त्योहार देवी दुर्गा के नौ रूपों का सम्मान करता है, जिन्हें नवदुर्गा के नाम से जाना जाता है: शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री। प्रत्येक रूप दिव्य स्त्री शक्ति के एक अलग पहलू का प्रतिनिधित्व करता है — सृजन, संरक्षण, ज्ञान और मुक्ति। पहले दिन कलश स्थापना (दिव्य पात्र की स्थापना) सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान है, क्योंकि यह नौ दिनों तक आपके घर में देवी दुर्गा की उपस्थिति स्थापित करता है। अखंड ज्योति — एक लगातार जलने वाला दीपक — को अखंड भक्ति के प्रतीक के रूप में नवरात्रि के पहले से आखिरी दिन तक जलाया जाना चाहिए।

नवरात्रि कलश स्थापना मुहूर्त

कलश स्थापना नवरात्रि के पहले दिन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि में ही करनी चाहिए। सबसे शुभ मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त (लगभग 11:45 पूर्वाह्न से 12:30 अपराह्न) या सूर्योदय के पहले घंटे (ब्रह्म मुहूर्त) के दौरान होता है। कलश स्थापना के लिए चतुर्दशी तिथि, राहु काल और वृश्चिक लग्न से बचें। हमारी कुंडली विश्लेषण (₹499) आपके शहर और जन्म विवरण के आधार पर आपका व्यक्तिगत नवरात्रि मुहूर्त प्रदान कर सकता है।

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9 दिनों की नवरात्रि पूजा की तैयारी के लिए सामग्री का एक पूरा सेट चाहिए। अपनी सभी नवरात्रि आवश्यक वस्तुओं को एक ही स्थान पर ऑर्डर करने के लिए सनातन जर्नी स्टोर पर जाएँ — जिसमें कॉपर कलश, अखंड दीया, नारंगी सिंदूर और भी बहुत कुछ शामिल है। ₹499 से ऊपर के ऑर्डर पर मुफ्त डिलीवरी उपलब्ध है।

नवरात्रि पूजा विधि स्टेप-बाय-स्टेप

पहला दिन: कलश स्थापना (घटस्थापना)

यह नवरात्रि का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा की ओर एक साफ, ऊँचा स्थान चुनें। वेदी पर लाल कपड़ा (₹99) बिछाएँ। एक उथले बर्तन में साफ मिट्टी डालें और मिट्टी में 7 पवित्र अनाज (₹89) बोएँ — ये बहुतायत का प्रतिनिधित्व करते हैं और दिव्य आशीर्वाद के संकेत के रूप में 9 दिनों में अंकुरित होंगे। उसके ऊपर कॉपर कलश (₹599) रखें, जिसमें पानी और गंगाजल (₹59) भरा हो। पाँच आम के पत्ते मुख पर रखें और ऊपर लाल कपड़े में लपेटे हुए नारियल को रखें। कलश स्थापना मंत्र का जाप करते हुए कलश के चारों ओर एक मौली धागा (₹29) बाँधें। अखंड दीया (₹99) जलाएँ — यह नौ दिनों तक बुझना नहीं चाहिए।

पहला दिन की देवी: शैलपुत्री

दुर्गा का पहला रूप, हिमालय की पुत्री। सफेद फूल, गाय का घी और अक्षत (₹49) चढ़ाएँ। मंत्र जपें: "ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः।"

दूसरा दिन की देवी: ब्रह्मचारिणी

देवी का तपस्वी रूप। चीनी और पंचामृत चढ़ाएँ। मंत्र जपें: "ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः।" मूर्ति पर चंदन (₹39) लगाएँ।

तीसरा दिन की देवी: चंद्रघंटा

साहस और कृपा की देवी, जिनके माथे पर अर्धचंद्र है। दूध से बनी मिठाइयाँ चढ़ाएँ। रोली (₹45) लगाएँ और लाल फूल चढ़ाएँ। मंत्र जपें: "ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः।"

चौथा दिन की देवी: कूष्मांडा

ब्रह्मांड की निर्माता, सूर्य से संबंधित। मालपुए और देसी घी (₹179) के दीये चढ़ाएँ। मंत्र जपें: "ॐ देवी कूष्मांडायै नमः।"

पाँचवाँ दिन की देवी: स्कंदमाता

स्कंद (कार्तिकेय) की माता। केले और सफेद कमल के फूल चढ़ाएँ। मंत्र जपें: "ॐ देवी स्कंदमातायै नमः।"

छठा दिन की देवी: कात्यायनी

योद्धा देवी, महिषासुर का वध करने वाली। शहद चढ़ाएँ। नारंगी सिंदूर (₹45) लगाएँ — अविवाहित महिलाओं के लिए अच्छे पति की तलाश में यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। मंत्र जपें: "ॐ देवी कात्यायन्यै नमः।"

सातवाँ दिन की देवी: कालरात्रि

देवी का सबसे उग्र रूप, अंधकार और अज्ञान का नाश करने वाली। गुड़ (गुड़, ₹49) और तिल की मिठाइयाँ चढ़ाएँ। मंत्र जपें: "ॐ देवी कालरात्र्यै नमः।"

आठवाँ दिन की देवी: महागौरी (अष्टमी) — कन्या पूजन

शांति और पूर्णता की शुद्ध सफेद देवी। अष्टमी पर, पवित्र कन्या पूजन करें — 9 युवा लड़कियों (नवदुर्गा का प्रतिनिधित्व) को अपने घर पर आमंत्रित करें। उनके पैर धोएँ, उनके पैरों पर रोली (₹45) लगाएँ, भोजन (हलवा, पूरी, चना) चढ़ाएँ, उन्हें एक लाल चुनरी भेंट करें और पूजा के रूप में उनके पैर छूकर आशीर्वाद लें।

नौवाँ दिन की देवी: सिद्धिदात्री (नवमी) और कलश विसर्जन

सिद्धियों (दिव्य क्षमताओं) की प्रदाता। यदि संभव हो तो हवन करें, फिर नवरात्रि का समापन कलश विसर्जन के साथ करें — कलश के जल को तुलसी के पौधे या किसी पेड़ की जड़ में डालें। अंकुरित अनाजों को भी जल में या बगीचे में अर्पित किया जाता है। भीमसेनी कपूर (₹149) और आरती थाली (₹299) के साथ अंतिम आरती करें।

नवरात्रि पूजा सामग्री — पूरी खरीदारी सूची

वस्तु उद्देश्य ऑनलाइन खरीदें
कॉपर कलश कलश स्थापना — देवी का पात्र खरीदें ₹599
अखंड दीया 9 दिनों तक लगातार जलने वाला दीपक खरीदें ₹99
7 पवित्र अनाज कलश स्थापना के लिए मिट्टी के बर्तन में बोए गए खरीदें ₹89
लाल कपड़ा नवरात्रि स्थापना के लिए लाल वेदी वस्त्र खरीदें ₹99
गंगाजल कलश भरना और दैनिक शुद्धि खरीदें ₹59
रोली / कुमकुम देवी को दैनिक तिलक और चढ़ावा खरीदें ₹45
नारंगी सिंदूर विशेष रूप से छठे दिन (कात्यायनी) के लिए खरीदें ₹45
हल्दी की गांठ देवी को हल्दी की जड़ का चढ़ावा खरीदें ₹35
अक्षत देवी को दैनिक चावल का चढ़ावा खरीदें ₹49
मौली धागा कलश बांधना और भक्त का कलाई बैंड खरीदें ₹29
भीमसेनी कपूर दैनिक आरती कपूर खरीदें ₹149
आरती थाली सेट 9 दिनों के लिए दैनिक आरती खरीदें ₹299
चंदन पाउडर देवी मूर्ति के लिए चंदन तिलक खरीदें ₹39

नवरात्रि पूजा सामग्री खरीदें

घटस्थापना, दैनिक आरती और देवी पूजा के लिए केवल वही सामग्री चुनें जो आपके घर की परंपरा में उपयोग होती है।

घटस्थापना और देवी पूजा की परंपराएं अलग हो सकती हैं; ऑर्डर से पहले परिवार या पंडित की विधि से मिलान करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या हम बिना उपवास के नवरात्रि पूजा कर सकते हैं?

हाँ। जबकि नवरात्रि के दौरान उपवास (व्रत) रखना बहुत पुण्यदायी है, यह एक व्यक्तिगत प्रतिबद्धता है और पूजा करने के लिए अनिवार्य नहीं है। कई परिवार बिना पूर्ण उपवास रखे दैनिक पूजा, कलश स्थापना और आरती करते हैं — विशेष रूप से बुजुर्ग, बच्चे, गर्भवती महिलाएँ और स्वास्थ्य समस्याओं वाले लोग। सबसे महत्वपूर्ण बात है सच्ची भक्ति और नौ दिनों तक देवी की नियमित पूजा।

नवरात्रि के दौरान दुर्गा के 9 रूपों की पूजा क्यों की जाती है?

नवदुर्गा हैं: 1) शैलपुत्री (पर्वतों की पुत्री), 2) ब्रह्मचारिणी (तपस्वी रूप), 3) चंद्रघंटा (अर्धचंद्र धारण करने वाली देवी), 4) कूष्मांडा (ब्रह्मांड की निर्माता), 5) स्कंदमाता (स्कंद की माता), 6) कात्यायनी (योद्धा देवी), 7) कालरात्रि (अंधकार का नाश करने वाली), 8) महागौरी (शुद्ध सफेद रूप), और 9) सिद्धिदात्री (दिव्य शक्तियाँ प्रदान करने वाली)। प्रत्येक विशिष्ट चढ़ावों, रंगों और मंत्रों से जुड़ा है।

नवरात्रि के दौरान हर दिन क्या चढ़ाएँ?

हर दिन एक पारंपरिक चढ़ावा होता है: पहला दिन — घी; दूसरा दिन — चीनी; तीसरा दिन — दूध; चौथा दिन — मालपुआ; पाँचवाँ दिन — केला; छठा दिन — शहद; सातवाँ दिन — गुड़ (गुड़, ₹49); आठवाँ दिन — नारियल; नौवाँ दिन — तिल के बीज। देवी के प्रत्येक दिन के पसंदीदा रंग के ताजे फूल भी चढ़ाए जाते हैं।

नवरात्रि के हर दिन हमें कौन से कपड़े पहनने चाहिए?

पारंपरिक रंग: पहला दिन — ग्रे, दूसरा दिन — नारंगी, तीसरा दिन — सफेद, चौथा दिन — लाल, पाँचवाँ दिन — शाही नीला, छठा दिन — पीला, सातवाँ दिन — हरा, आठवाँ दिन — मोर पंख हरा, नौवाँ दिन — बैंगनी। पूजा करते समय उस दिन का रंग पहनने से उस दिन की दुर्गा के रूप के साथ ऊर्जावान संबंध गहरा होता है।

अष्टमी पर कन्या पूजन का क्या महत्व है?

कन्या पूजन (जिसे कुमारी पूजन भी कहा जाता है) 2 से 10 वर्ष की 9 युवा लड़कियों की नवदुर्गा के जीवंत अवतार के रूप में धार्मिक पूजा है। लड़कियों का पैर धोकर, रोली तिलक लगाकर, और हलवा-पूरी-चना का भोजन कराकर स्वागत किया जाता है। उन्हें उपहार (विशेष रूप से एक चुनरी और कुछ पैसे) दिए जाते हैं। उनके पैर छूना और उनका आशीर्वाद लेना देवी की पूजा के समान माना जाता है। यह अनुष्ठान अष्टमी या नवमी, या दोनों पर किया जाता है।

अगर नवरात्रि के दौरान अखंड ज्योति बुझ जाए तो क्या होगा?

यदि अखंड ज्योति (₹99) गलती से बुझ जाए, तो इसे तुरंत एक शुद्ध लौ से फिर से जलाएँ (माचिस से नहीं — दूसरे दीये या केवल पूजा के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले लाइटर का उपयोग करें)। देवी से ईमानदारी से क्षमा याचना करें, एक संक्षिप्त प्रार्थना करें और जारी रखें। देवी दयालु हैं और मानवीय अपूर्णता को समझती हैं — एक छोटी सी चूक को अपनी नौ दिवसीय भक्ति को पटरी से उतरने न दें।

नौ पवित्र रातों के लिए देवी का सम्मान करें

नवरात्रि शक्ति — दिव्य स्त्री ऊर्जा जो सभी सृजन को बनाए रखती है — से जुड़ने का साल का सबसे शक्तिशाली समय है। अपना कलश स्थापित करें, अपनी अखंड ज्योति जलाएँ, और भक्ति और आनंद के साथ अपनी नौ दिवसीय यात्रा शुरू करें।

जय माता दी! दिव्य माँ के नौ रूप आपको और आपके परिवार को शक्ति, ज्ञान और कृपा प्रदान करें।

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