नवरात्रि में प्रार्थना, चिंतन और उत्सव के माध्यम से देवी की उपासना होती है। प्रचलित नवदुर्गा क्रम है: शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री। शारदीय नवरात्रि दुर्गा की महिषासुर पर विजय से जुड़ी है, लेकिन इसकी अभिव्यक्ति क्षेत्रों के अनुसार अलग होती है।
सभी क्षेत्रों में एक जैसी विधि नहीं
कई घरों में घटस्थापना, पाठ, आरती और कन्या पूजन होते हैं। गुजरात में गरबा और डांडिया, बंगाल में विशिष्ट दुर्गा पूजा क्रम तथा दक्षिण भारत में गोलू, सरस्वती या आयुध पूजा की परंपराएँ महत्वपूर्ण हैं। चैत्र और शारदीय नवरात्रि अलग अवसर हैं। किसी क्षेत्र का देवी क्रम या नौ रंग अपनाने से पहले उसका संदर्भ समझें।
कब है? · पंचांग तिथि
संदर्भ स्थान: नई दिल्ली · IST (UTC+05:30)
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कब है? · पंचांग तिथि · 2026
तारीख
अवसर
पंचांग तिथि
चैत्र नवरात्रि आरंभ
शुक्ल प्रतिपदा
तिथि आरंभ:
तिथि समाप्त:
शारदीय नवरात्रि आरंभ
शुक्ल प्रतिपदा
तिथि आरंभ:
तिथि समाप्त:
शारदीय नवरात्रि: नौ दिनों का कैलेंडर · 2026
नई दिल्ली के लिए देवी-उपासना के नौ कैलेंडर दिन। ऊपर चैत्र नवरात्रि की मुख्य तिथियाँ भी दी हैं; यह योजना शारदीय नवरात्रि की है।
1
शैलपुत्री; घटस्थापना
कलश स्थापना कर दैनिक देवी पूजा शुरू करें।
2
ब्रह्मचारिणी
दूसरे दिन प्रार्थना और व्रत की नियमित दिनचर्या रखें।
3
चंद्रघंटा
देवी आरती और घर की पूजा जारी रखें।
4
कूष्मांडा
दीपक, फूल और दिन का सरल भोग तैयार रखें।
5
स्कंदमाता
आगे की पूजा और पारिवारिक व्रत-योजना देखें।
6
कात्यायनी; सरस्वती आवाहन
सरस्वती आवाहन में अपनी पारिवारिक परंपरा का पालन करें।
7
कालरात्रि; सरस्वती पूजा
समापन के पूजा-दिनों की तैयारी करें।
8
सप्तमी जारी
अष्टमी की तैयारी करें; केवल दिन संख्या देखकर पूजा पहले न करें।
9
महागौरी; दुर्गा अष्टमी और महा नवमी
दिल्ली में दोनों पर्व आज हैं; कन्या पूजन पारिवारिक रीति से करें।
दिल्ली में 2026 का क्रम विशेष है: 18 अक्टूबर को दिन-वार कैलेंडर में सप्तमी बनी रहती है, जबकि दुर्गा अष्टमी और महा नवमी दोनों 19 अक्टूबर को हैं। सिद्धिदात्री नवदुर्गा क्रम की नौवीं देवी हैं; समापन पूजा के लिए अपनी पारिवारिक परंपरा देखें।
नौ दिनों के बाद: 20 अक्टूबर: विजयादशमी / दशहरा; परंपरा अनुसार नवमी हवन या पारण भी इसी दिन हो सकता है।
तिथियाँ नई दिल्ली, भारत के लिए हैं। पूजा या व्रत का समय तय करने से पहले अपना शहर और पारिवारिक परंपरा जाँचें।
मुख्य तारीख शारदीय नवरात्रि की शुरुआत है। चैत्र के आरंभ अलग हैं। 2027 में प्रतिपदा सूर्योदय के बाद शुरू होकर अगले सूर्योदय से पहले समाप्त होती है; घटस्थापना में विशिष्ट नियम अपनाएँ, केवल सूर्योदय की सामान्य धारणा नहीं।
मिनट तक दिए गए तिथि समय खगोलीय संदर्भ हैं, पूरी पूजा/पारण अवधि नहीं। स्थानीय सूर्योदय, सूर्यास्त और पारिवारिक परंपरा से व्रत/पर्व नियम बदल सकते हैं। पूजा से पहले अपना स्थान जाँचें।
यहाँ केवल 2026 और 2027 डेटा है। बाद के वर्ष के लिए सत्यापित वार्षिक जानकारी अपडेट करें।
क्रम से तैयारी करें
सहज और नियमित उपासना की योजना
अपने परिवार के अनुकूल प्रार्थना क्रम चुनें। व्रत की पद्धति अलग होती है; यह गाइड नौ दिन या निर्जल व्रत को अनिवार्य नहीं बताता। पूजा स्थान और भोग तैयार करें तथा विस्तृत पाठ के लिए उचित मार्गदर्शन लें। अखंड दीप रखने पर सुरक्षित निगरानी आवश्यक है; लौ को अकेला न छोड़ें।
1
ऋतु और परंपरा चुनें
चैत्र या शारदीय नवरात्रि तथा अपनी पारिवारिक या क्षेत्रीय पद्धति की पुष्टि करें।
2
घटस्थापना का समय अलग देखें
यदि कलश स्थापना आपकी विधि में है तो शहर का उचित मुहूर्त जाँचें। पर्व की शुरुआत की तारीख स्वयं पूजा का समय नहीं है।
3
दैनिक पूजा की योजना बनाएँ
प्रार्थना, आरती और चुने हुए पाठ का सुविधाजनक समय रखें। ताज़ा भोग परंपरा के अनुसार तैयार करें।
4
समापन अनुष्ठान जाँचें
अष्टमी, नवमी और कन्या पूजन की तिथियाँ अलग देखें। हर देवी स्वरूप को बिना जाँच अलग तारीख देना सही नहीं हो सकता।
तैयारी की उपयोगी सूची
उपलब्ध उपयुक्त सामग्री दोबारा उपयोग करें। फूल और ताज़ा भोजन स्थानीय रूप से लें। यह पारिवारिक तैयारी गाइड है, सभी के लिए अनिवार्य खरीदारी सूची नहीं।
सामग्री
क्यों उपयोगी हो सकती है
देवी चित्र और साफ पूजा वस्त्र
घर में पूजित स्वरूप और उपलब्ध वस्त्र का उपयोग करें।
कलश और पारंपरिक सामग्री
घटस्थापना आपकी विधि में हो तभी चुनें।
दीपक, बाती और उचित तेल या घी
दैनिक आरती के लिए सुरक्षित निगरानी में उपयोग करें।
फूल और पारंपरिक भोग
प्रत्येक दिन ताज़ा सामग्री स्थानीय रूप से तैयार करें।
पाठ और आरती संदर्भ
चुनी हुई उपासना के लिए विश्वसनीय पुस्तक या गाइड।
श्रृंगार या बोने की सामग्री
परंपरा-विशिष्ट या वैकल्पिक, सभी के लिए आवश्यक नहीं।
पद्धतियाँ अलग हैं। कुछ परिवार चुने हुए दिनों या परिवर्तित क्रम से व्रत करते हैं। यह सांस्कृतिक गाइड है, व्यक्तिगत आहार या चिकित्सा सलाह नहीं।
क्या दुर्गा पूजा और पूरा नवरात्रि क्रम एक ही हैं?
दोनों देवी उपासना से जुड़े हैं, लेकिन क्षेत्रीय दुर्गा पूजा की विधि और तिथियों को अलग पहचान के साथ दिखाना चाहिए।
2027 की घटस्थापना में विशेष ध्यान क्यों चाहिए?
दिल्ली संदर्भ में 30 सितंबर को प्रतिपदा सूर्योदय के बाद शुरू होकर अगले सूर्योदय से पहले समाप्त होती है। केवल सूर्योदय की तिथि देखकर निर्णय न लें; घटस्थापना के विशिष्ट नियम, उपयुक्त स्थानीय पूजा अवधि और पारिवारिक मार्गदर्शन अपनाएँ।
क्या कन्या पूजन और महानवमी हमेशा अलग दिन होते हैं?
नहीं। चंद्र तिथियाँ एक तारीख पर आ सकती हैं। परिवार अष्टमी या नवमी पर कन्या पूजन करते हैं; अपनी परंपरा और प्रत्येक तिथि देखें।
सनातन जर्नी मेरा प्रयास है कि हमारी परंपराओं को समझना और अपनाना आसान हो—उपयोगी मार्गदर्शिकाओं, सोच-समझकर चुनी गई पूजा सामग्री और साथ सीखने वाले समुदाय के माध्यम से।